दुर्गा सप्तशती का पाठ भगवान दुर्गा की पूजा और उनके विधि

 दुर्गा सप्तशती का पाठ दुर्गा माता की पूजा के साथ किया जाता है और इसका महत्वपूर्ण हिस्सा नवरात्रि जैसे त्योहारों पर होता है। यहां दुर्गा सप्तशती का पाठ करने के विधि को संक्षेप में बताया गया है:


**1. तैयारी:**

   - पूजा के लिए एक शुद्ध स्थान चुनें जो सुखद और शांत हो।

   - दुर्गा सप्तशती पाठ के लिए एक पुस्तक या मोबाइल ऐप्लिकेशन का सहायता लें, जिसमें श्लोक और मन्त्र होते हैं.


**2. स्नान:**

   - पूजा के पहले स्नान करें और शुद्ध वस्त्र पहनें।


**3. अध्यात्मिक स्थिति:**

   - ध्यान में चले जाएं और मां दुर्गा को अपने मन में ध्यान में लाएं।


**4. कलश पूजा:**

   - कलश पूजा करें, जिसमें पूर्ण कलश में जल और फूल डालें और उसे बन्ध दें।


**5. गणेश पूजा:**

   - गणेश की पूजा करें, जो दुर्गा पूजा का आरंभ करते समय प्रथम पूज्य होते हैं।


**6. दुर्गा सप्तशती पाठ:**

   - दुर्गा सप्तशती के श्लोकों का पाठ करें, विधि के अनुसार।


1. या देवी सर्वभू‍तेषु माँ दुर्गा रूपेण संस्थिता।

   नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।1।।


2. या देवी सर्वभू‍तेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।

   नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।2।।


3. या देवी सर्वभू‍तेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता।

   नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।3।।


4. या देवी सर्वभू‍तेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता।

   नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।4।।


5. या देवी सर्वभू‍तेषु मोहरूपेण संस्थिता।

   नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।5।।


6. या देवी सर्वभू‍तेषु प्रितिरूपेण संस्थिता।

   नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।6।।


7. या देवी सर्वभू‍तेषु शांतिरूपेण संस्थिता।

   नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।7।।


8. या देवी सर्वभू‍तेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता।

   नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।8।।


9. या देवी सर्वभू‍तेषु क्रियारूपेण संस्थिता।

   नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।9।।


10. या देवी सर्वभू‍तेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता।

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।10।।


11. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।

    सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया।


12. श्वेतपद्मासना मातरः श्वेतपद्मासना अम्बा।

    आशिनं देविसद्देवी दादी मे विश्वमुखये।


13. एकचतुर्भुजा देवी त्रिभुजाञ्च महेश्वरी।

    रुद्राणी सततं तुष्टा त्रिभक्ताञ्च त्रिदेवताः।


14. एकपुत्रान्तरा देवी भार्गवी तपसांश्रिता।

    शंकरी शंकरपार्वती त्रिलोके मम मङ्गला।


15. मातरः सर्वजगतां दुर्गा रूपेण संस्थिता।

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।


16. या देवी सर्वभूष्टेषु विष्णुमायेति शब्दिता।

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।


17. या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता।

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।


18. या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता।

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।


19. या देवी सर्वभूतेषु कान्तिरूपेण संस्थिता।

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।


20. या देवी सर्वभूतेषु द्रोहरूपेण संस्थिता।

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।


21. या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।


22. या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता।

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।


23. या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता।

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।


24. या देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता।

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।


25. या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता।

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।


26. या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।


27. या देवी सर्वभूतेषु दृतिरूपेण संस्थिता।

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।


28. या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता।

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।


29. या देवी सर्वभूतेषु पूष्टिरूपेण संस्थिता।

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।


30. या देवी सर्वभूतेषु तुक्ष्मिरूपेण संस्थिता।

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।


**7. आरती:**

   - दुर्गा माता की आरती गाएं और दीपक जलाएं।

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्म शिवजी।

ओम् जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।


माँ, चंद मुण्ड संहारी, माँ, शोंभव निग्रहाणी।

माँ, मोहिनी, मोहरते, माँ महिषासुरमर्दिनी।

ओम् जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।


माँ, चंद के दिव्य चरणों में शरण गहीं निस दिन हारी।

माँ, वैष्णो देवी, माई यही आवतारी।

ओम् जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।


माँ, ब्रह्माणी, माँ शिवाणी, माँ तुझ चरणों की धूलि सुख कर नाम जपूँ निस दिन मैं, माँ, तुझ चरणों में आराधना।

ओम् जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।


वैष्णवी शरणों में, तुझ चरणों की धूलि सुख कर नाम जपूँ निस दिन मैं, तुझ चरणों में आराधना।

ओम् जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।


**8. प्रसाद:**

   - पूजा के बाद प्रसाद तैयार करें और उसे मां दुर्गा को अर्पण करें।


**9. व्रत:**

   - आपके द्वारा चुने गए व्रत के अनुसार नियमित रूप से उपवास रखें और अनुष्ठान का पालन करें।


**10. ध्यान और आत्मा का संयम:**

    - दुर्गा सप्तशती पाठ के दौरान, आपको अपने मन को ध्यान में और आत्मा को नियंत्रण में रखना चाहिए।


यह पूजन का एक सामान्य तरीका है, लेकिन विभिन्न स्थानों और परंपराओं में इसके कुछ छोटे और विस्तारित रूप हो सकते हैं। दुर्गा सप्तशती का पाठ आत्मिक और धार्मिक उन्नति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, और इसे श्रद्धा और समर्पण के साथ किया जाता है।

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